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Indian Political News: शशि थरूर की बैठक से दूरी, राहुल गांधी से नाराज़गी की चर्चा, केरल चुनाव से पहले कांग्रेस में हलचल

Indian Political News: केरल विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस पार्टी के भीतर अंदरूनी हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। शुक्रवार को कांग्रेस सांसद शशि थरूर द्वारा दिल्ली में बुलाई गई अहम बैठक में शामिल न होने के बाद सियासी गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। यह बैठक कांग्रेस हाईकमान द्वारा केरल चुनावों की रणनीति और तैयारियों को लेकर आयोजित की गई थी, लेकिन थरूर की गैरमौजूदगी ने पार्टी के भीतर कथित असंतोष की अटकलों को हवा दे दी।

शशि थरूर की अनुपस्थिति को लेकर सबसे पहले यह चर्चा सामने आई कि वह कांग्रेस नेता राहुल गांधी से नाराज़ हैं और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से उन्हें अपेक्षित सम्मान नहीं मिल रहा। इन अटकलों ने तब और जोर पकड़ा जब सूत्रों के हवाले से कहा गया कि हाल ही में कोच्चि में आयोजित एक महापंचायत कार्यक्रम के दौरान थरूर को सार्वजनिक रूप से “अपमानित” महसूस हुआ था।

हालांकि, बाद में कांग्रेस सूत्रों ने इन अटकलों को खारिज करते हुए सफाई दी कि शशि थरूर ने दिल्ली बैठक में शामिल न होने के लिए पहले ही पार्टी हाईकमान से अनुमति ले ली थी। पार्टी के अनुसार, थरूर उस दिन केरल में अपने संसदीय क्षेत्र तिरुवनंतपुरम में मौजूद रहना चाहते थे, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रोड शो और जनसभा आयोजित थी।

कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि शशि थरूर अपने क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियों पर नजर रखने और स्थानीय हालात को समझने के लिए वहीं रहना चाहते थे। प्रधानमंत्री के दौरे को देखते हुए थरूर की मौजूदगी को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा था, इसी वजह से उन्होंने दिल्ली की बैठक छोड़ने का फैसला किया।

इससे पहले जो जानकारी सामने आई थी, उसके मुताबिक शशि थरूर को कोच्चि में हुए महापंचायत कार्यक्रम के दौरान मंच व्यवस्था और वक्ताओं की सूची को लेकर आपत्ति थी। बताया गया कि उन्हें पहले यह कहा गया था कि उनके बाद केवल राहुल गांधी ही मंच से संबोधित करेंगे, लेकिन कार्यक्रम के दौरान इस तय योजना में बदलाव कर दिया गया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, राहुल गांधी के पहुंचने के बाद कई अन्य पार्टी नेताओं ने भी मंच से भाषण दिए। यह बदलाव न सिर्फ तय कार्यक्रम के खिलाफ था, बल्कि इसे कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के तौर पर शशि थरूर के प्रोटोकॉल का उल्लंघन भी माना गया। पार्टी के अंदरखाने में इसे एक सार्वजनिक अनदेखी के रूप में देखा गया, जिससे थरूर असहज महसूस कर रहे थे।

सूत्रों का यह भी कहना है कि महापंचायत कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने अपने भाषण में शशि थरूर का नाम नहीं लिया। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, केरल की राजनीति और कांग्रेस संगठन में थरूर की अहम भूमिका को देखते हुए यह चूक काफी उल्लेखनीय मानी गई। इसी बात ने पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच चर्चा को और तेज कर दिया।

बताया जा रहा है कि शशि थरूर ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अपने करीबी सहयोगियों से निराशा जाहिर की। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि यह घटना पार्टी में उनके योगदान को नजरअंदाज करने की एक बड़ी तस्वीर का हिस्सा है। सूत्रों का दावा है कि वह न सिर्फ राज्य नेतृत्व बल्कि केंद्रीय नेतृत्व के रवैये से भी असंतुष्ट हैं।

इन घटनाओं के बाद कांग्रेस के अंदर अनुशासन, वरिष्ठ नेताओं को सम्मान और संगठनात्मक तालमेल को लेकर बहस शुरू हो गई है। पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस तरह की घटनाएं चुनाव से पहले संगठन को कमजोर कर सकती हैं, खासकर तब जब केरल में मुकाबला पहले से ही कड़ा माना जा रहा है।

हालांकि, कांग्रेस पार्टी की ओर से अब तक शशि थरूर की नाराज़गी या बैठक में अनुपस्थिति को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। पार्टी सूत्रों का जोर है कि थरूर और नेतृत्व के बीच कोई टकराव नहीं है और दिल्ली बैठक से उनकी गैरमौजूदगी को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।

इसी बीच, शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल के तिरुवनंतपुरम में भव्य रोड शो किया और एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कई विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया। प्रधानमंत्री ने पीएम स्वनिधि क्रेडिट कार्ड योजना की शुरुआत की और एक लाख लाभार्थियों को पीएम स्वनिधि ऋण वितरित किए।

इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने चार नई ट्रेन सेवाओं को हरी झंडी दिखाई, जिनमें तीन अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें और एक यात्री ट्रेन शामिल हैं। इन परियोजनाओं को केंद्र सरकार द्वारा केरल के विकास के प्रति प्रतिबद्धता के रूप में पेश किया गया।

जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने केरल में वामपंथी दलों और कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उन्होंने राज्य की जनता से आगामी विधानसभा चुनावों में एनडीए को मौका देने की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि केरल को विकास की नई दिशा देने के लिए बदलाव जरूरी है।

अपने भाषण के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने दुर्लभ रूप से अंग्रेजी भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा, “Now is the time of Viksit Keralam. Now is the time for the NDA government.” उनके इस बयान को आगामी चुनावों के लिए एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

कुल मिलाकर, शशि थरूर की दिल्ली बैठक से दूरी और कांग्रेस के भीतर उठे सवाल ऐसे समय सामने आए हैं जब पार्टी केरल चुनावों की रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटी है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह घटनाक्रम सिर्फ एक गलतफहमी था या फिर कांग्रेस के अंदर किसी गहरे असंतोष का संकेत।

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