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PM Modi UAE Visit: भारत-UAE में न्यूक्लियर, AI और LNG पर समझौते

PM Modi UAE Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच सोमवार को हुई अहम बैठक ने भारत-UAE रणनीतिक साझेदारी को एक नई दिशा दी है। यह मुलाकात भले ही समय के लिहाज से छोटी रही, लेकिन इसके एजेंडे और नतीजे काफी व्यापक और दूरगामी माने जा रहे हैं। करीब दो घंटे चली इस बातचीत में ऊर्जा सुरक्षा, न्यूक्लियर सहयोग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा, आतंकवाद विरोधी प्रयास और व्यापार जैसे कई अहम मुद्दों पर सहमति बनी।

विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच बेहद गर्मजोशी और आपसी भरोसे का माहौल देखने को मिला। बैठक प्रतिबंधित और प्रतिनिधिमंडल स्तर, दोनों ही स्तरों पर हुई। इस दौरान कई समझौतों, आशय पत्रों और सहयोग प्रस्तावों का आदान-प्रदान किया गया, जिससे यह साफ हो गया कि भारत और UAE का रिश्ता अब पारंपरिक कूटनीति से आगे बढ़कर रणनीतिक साझेदारी के मजबूत ढांचे में बदल चुका है।

इस उच्चस्तरीय बैठक में UAE की ओर से भी एक मजबूत प्रतिनिधिमंडल मौजूद था। अबू धाबी और दुबई के शाही परिवार के सदस्य, क्राउन प्रिंस ऑफ दुबई शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन मकतूम और UAE के रक्षा मंत्री समेत कई वरिष्ठ मंत्री इसमें शामिल हुए। यह उपस्थिति खुद इस बात का संकेत थी कि UAE भारत के साथ रिश्तों को कितनी प्राथमिकता देता है।

बैठक में ऊर्जा सुरक्षा एक प्रमुख मुद्दा बनकर उभरी। दोनों देशों ने 10 वर्षों के LNG आपूर्ति समझौते का स्वागत किया, जिसके तहत 2028 से हर साल 0.5 मिलियन टन लिक्विफाइड नेचुरल गैस भारत को सप्लाई की जाएगी। यह समझौता हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड और ADNOC Gas के बीच हुआ है। इस डील के साथ UAE भारत के सबसे बड़े LNG सप्लायर्स में शामिल हो गया है। वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के बीच इस समझौते को भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

भारत-UAE रिश्तों में इस बार एक नया और महत्वपूर्ण आयाम सिविल न्यूक्लियर सहयोग के रूप में जुड़ा। दोनों देशों ने उन्नत न्यूक्लियर तकनीकों पर मिलकर काम करने पर सहमति जताई है। इसमें बड़े न्यूक्लियर रिएक्टरों के साथ-साथ स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स यानी SMRs के विकास और उपयोग की संभावनाएं शामिल हैं। भारत में हाल ही में लागू हुए SHANTI कानून के बाद अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए रास्ते खुले हैं और UAE इस दिशा में भारत का अहम साझेदार बन सकता है।

न्यूक्लियर क्षेत्र में सहयोग केवल रिएक्टर निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें न्यूक्लियर पावर प्लांट के संचालन, रखरखाव और सुरक्षा मानकों को मजबूत करने जैसे पहलू भी शामिल होंगे। यह साझेदारी भारत की स्वच्छ ऊर्जा रणनीति को मजबूती दे सकती है और UAE को भी उन्नत न्यूक्लियर तकनीक में भागीदारी का अवसर प्रदान करेगी।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल टेक्नोलॉजी भी इस बैठक के अहम एजेंडे में शामिल रहे। दोनों देशों ने भारत में एक सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर स्थापित करने और डेटा सेंटर क्षमता में UAE निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की। इसके साथ ही “डिजिटल एम्बेसी” जैसे नए कॉन्सेप्ट पर भी विचार किया गया, जिसमें डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर आपसी संप्रभुता को मान्यता देने की बात कही गई।

UAE राष्ट्रपति ने फरवरी 2026 में भारत में प्रस्तावित AI Impact Summit के लिए समर्थन भी जताया। यह कदम भारत को वैश्विक AI इकोसिस्टम में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में देखा जा रहा है।

रक्षा और सुरक्षा सहयोग को भी इस मुलाकात से नई गति मिली। दोनों देशों ने रणनीतिक रक्षा साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ने के लिए एक लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर किए। हाल के वर्षों में सैन्य अभ्यासों और सेवा प्रमुखों के आपसी दौरों से जो गति बनी थी, उसे और मजबूत करने पर सहमति बनी।

आतंकवाद के मुद्दे पर दोनों देशों का रुख एकदम स्पष्ट और सख्त रहा। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद ने सीमा पार आतंकवाद समेत हर तरह के आतंकवाद की कड़ी निंदा की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद के दोषियों, उनके फंडिंग नेटवर्क और समर्थकों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए। FATF के ढांचे के तहत आतंकवाद के वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ सहयोग जारी रखने पर भी सहमति बनी।

व्यापार और निवेश भारत-UAE रिश्तों का एक और मजबूत स्तंभ बनकर उभरा है। 2022 में हुए व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के बाद द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2024-25 में 100 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। दोनों देशों ने 2032 तक इसे 200 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य तय किया है।

निवेश के मोर्चे पर गुजरात के धोलेरा में प्रस्तावित स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन में UAE की भागीदारी पर भी चर्चा हुई। इसमें अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, ग्रीनफील्ड पोर्ट, ऊर्जा परियोजनाएं और स्मार्ट सिटी विकास जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शामिल हैं। इसके अलावा भारत मार्ट, वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर और भारत-अफ्रीका सेतु जैसी पहलों को तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए, ताकि MSME सेक्टर को पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरेशिया से जोड़ा जा सके।

अंतरिक्ष क्षेत्र में भी सहयोग को और गहरा करने पर सहमति बनी। दोनों देश स्पेस साइंस और टेक्नोलॉजी के व्यावसायीकरण, सैटेलाइट निर्माण और लॉन्च सुविधाओं पर मिलकर काम करेंगे। खाद्य सुरक्षा और कृषि क्षेत्र में टिकाऊ सप्लाई चेन और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप पर भी जोर दिया गया, जिससे भारतीय किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

जन-संपर्क और सांस्कृतिक रिश्तों पर भी विशेष ध्यान दिया गया। UAE में करीब 45 लाख भारतीय रहते हैं और दोनों नेताओं ने युवाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर सहमति जताई। अबू धाबी में ‘हाउस ऑफ इंडिया’ की स्थापना का फैसला भी इसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी दोनों नेताओं ने विचार साझा किए। पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता के समर्थन को दोहराया गया। UAE ने 2026 में भारत की BRICS अध्यक्षता का समर्थन किया, जबकि भारत ने उसी साल UAE में होने वाले संयुक्त राष्ट्र जल सम्मेलन के लिए समर्थन जताया।

बैठक के अंत में राष्ट्रपति शेख मोहम्मद ने प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत करने के लिए धन्यवाद दिया और इस यात्रा को भारत-UAE रणनीतिक रिश्तों के निरंतर विस्तार की दिशा में एक और मजबूत कदम बताया।

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