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BMC Exit Polls: मुंबई में BJP-Shiv Sena की बड़ी जीत के संकेत, ठाकरे खेमे को भारी झटका!

BMC Exit Polls: मुंबई की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव को लेकर आए एग्जिट पोल्स में बीजेपी-शिवसेना (शिंदे गुट) गठबंधन को स्पष्ट बढ़त मिलती दिख रही है। ज्यादातर सर्वे एजेंसियों का अनुमान है कि महायुति गठबंधन एशिया की सबसे अमीर नगर निगम में 130 से ज्यादा वार्ड जीत सकता है, जो सत्ता पर मजबूत पकड़ का संकेत देता है।

Axis My India के एग्जिट पोल के मुताबिक, बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को 131 से 151 सीटें मिलने की संभावना है। वहीं, JVC सर्वे ने गठबंधन के खाते में 138 वार्ड जाने का अनुमान जताया है। इन आंकड़ों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है, हालांकि महाराष्ट्र की राजनीति में एग्जिट पोल कई बार चौंकाने वाले साबित हुए हैं।

वर्षों बाद हुए चुनाव, बदले समीकरण

करीब आठ साल बाद हुए इन चुनावों में मुकाबला बेहद दिलचस्प और कांटे का रहा। 2017 के बाद पहली बार BMC के लिए चुनाव हुए और इस दौरान महाराष्ट्र की राजनीति पूरी तरह बदली हुई नजर आई। शिवसेना और एनसीपी के टूटने के बाद बने नए गुटों ने गठबंधन की परिभाषा ही बदल दी।

इन चुनावों में मराठी अस्मिता, स्थानीय पहचान और सत्ता की पकड़ को लेकर जबरदस्त संघर्ष देखने को मिला। हर दल ने अपनी रणनीति बदली और आखिरी समय तक समीकरण बनते-बिगड़ते रहे।

ठाकरे बंधुओं की वापसी भी नहीं दिखी असरदार

इस चुनाव की सबसे बड़ी राजनीतिक घटना मानी जा रही थी उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की 20 साल बाद हुई सुलह। उम्मीद की जा रही थी कि शिवसेना (UBT) और मनसे का गठबंधन मुंबई में मराठी वोटों को एकजुट करेगा, लेकिन एग्जिट पोल इसके उलट तस्वीर पेश कर रहे हैं।

Axis My India के अनुसार, इस गठबंधन को केवल 58 से 68 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं JVC सर्वे ने इसे 59 वार्ड तक सीमित बताया है। इससे साफ है कि ठाकरे बंधुओं की यह राजनीतिक दोस्ती फिलहाल कोई बड़ा चमत्कार नहीं कर पाई।

कांग्रेस और VBA की कमजोर स्थिति

कांग्रेस ने आखिरी वक्त में प्रकाश आंबेडकर की वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) के साथ गठबंधन किया था, लेकिन इसका खास फायदा होता नहीं दिख रहा। एग्जिट पोल्स के मुताबिक कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टी को 12 से 16 सीटें ही मिल सकती हैं। यह आंकड़ा दिखाता है कि मुंबई की राजनीति में कांग्रेस की पकड़ लगातार कमजोर हो रही है।

BMC पर शिवसेना का पुराना दबदबा टूटा?

1985 से लेकर अब तक (1992-96 को छोड़कर) BMC पर अविभाजित शिवसेना का वर्चस्व रहा है। यही वह किला था, जहां ठाकरे परिवार की सबसे मजबूत पकड़ मानी जाती थी। लेकिन मौजूदा एग्जिट पोल संकेत दे रहे हैं कि यह पकड़ अब ढीली पड़ रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को जमीनी स्तर पर जबरदस्त समर्थन मिला है, जिसने उद्धव ठाकरे गुट की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

अन्य सर्वे एजेंसियों के अनुमान

लगभग सभी एग्जिट पोल्स में महायुति को बहुमत मिलता दिख रहा है।
JDS सर्वे ने बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को 127 से 154 वार्ड मिलने का अनुमान दिया है।
Janmat Polls के अनुसार गठबंधन को 138 सीटें मिल सकती हैं।
DV Research ने महायुति को 107 से 122 सीटों के बीच बताया है।

औसतन देखा जाए तो छह प्रमुख एग्जिट पोल्स में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को करीब 132 वार्ड मिलते दिख रहे हैं, जबकि उद्धव ठाकरे-मनसे गठबंधन काफी पीछे 65 सीटों पर सिमट सकता है। कांग्रेस और सहयोगी दलों को कुल मिलाकर 20 वार्ड मिलने की संभावना जताई गई है।

मुंबई की सत्ता का महत्व

BMC में जीत का मतलब केवल नगर निगम की सत्ता नहीं, बल्कि देश की आर्थिक राजधानी मुंबई पर प्रभावी नियंत्रण है। यहां का बजट कई राज्यों से भी बड़ा है और राजनीतिक रूप से इसका महत्व बेहद ज्यादा है।

बीजेपी और शिंदे गुट के लिए यह जीत महाराष्ट्र की राजनीति में उनकी स्थिति को और मजबूत कर सकती है, जबकि ठाकरे परिवार के लिए यह एक बड़ा झटका साबित हो सकती है।

2017 के चुनावों की झलक

2017 के BMC चुनावों में शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और उसने 84 सीटें जीती थीं। बीजेपी 82 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही थी। कांग्रेस को 31 सीटें, एनसीपी को 9 और मनसे को 7 सीटें मिली थीं।

वोट शेयर की बात करें तो शिवसेना को 28.29%, बीजेपी को 27.32%, कांग्रेस को 15.94%, मनसे को 7.73% और एनसीपी को 4.91% वोट मिले थे।

नतीजों पर सबकी नजर

अब सबकी निगाहें शुक्रवार को आने वाले आधिकारिक नतीजों पर टिकी हैं। अगर एग्जिट पोल के अनुमान सही साबित होते हैं, तो यह मुंबई की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत मानी जाएगी।

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