
TCS Job Cuts: भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों के लिए चिंता की खबर है। कंपनी ने साफ कर दिया है कि 2025 में शुरू हुआ उसका रीस्ट्रक्चरिंग प्लान अभी खत्म नहीं हुआ है और इससे जुड़े जॉब कट्स 2026 तक जारी रह सकते हैं। यह जानकारी कंपनी ने अपने तीसरी तिमाही (Q3) के नतीजों के बाद दी है।
पिछले साल TCS ने बड़े स्तर पर संगठनात्मक बदलावों की घोषणा की थी। माना जा रहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल, बदलती क्लाइंट डिमांड और लागत को नियंत्रित करने की जरूरत ने कंपनी को इस दिशा में कदम उठाने के लिए मजबूर किया। अब कंपनी का कहना है कि कर्मचारियों की संख्या में कटौती की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।
TCS ने हालांकि यह भी स्पष्ट किया है कि वह किसी तय संख्या के आधार पर छंटनी नहीं कर रही है। कंपनी के मुताबिक, हर कर्मचारी की विदाई के पीछे ठोस कारण होंगे और यह पूरी तरह से तय आंतरिक प्रक्रिया के तहत ही की जाएगी। इसके बावजूद, लगातार घटती हेडकाउंट, सख्त ऑफिस अटेंडेंस नियम और अप्रेज़ल में हो रही देरी ने कर्मचारियों की बेचैनी बढ़ा दी है।
कंपनी के चीफ ह्यूमन रिसोर्स ऑफिसर सुदीप कुन्नुमल ने विश्लेषकों को बताया कि अक्टूबर से दिसंबर 2025 की तिमाही में करीब 1,800 कर्मचारियों को कंपनी से बाहर किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाली तिमाही में भी कुछ कर्मचारियों के बाहर जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन इसका कोई टारगेट तय नहीं है।
हालांकि, TCS के तिमाही नतीजों के साथ जारी फैक्ट शीट कुछ और ही तस्वीर दिखाती है। आंकड़ों के मुताबिक, दूसरी तिमाही की तुलना में कंपनी की कुल कर्मचारी संख्या में 11,000 से ज्यादा की गिरावट आई है। इससे यह संकेत मिलता है कि हालिया तिमाही में कर्मचारियों की संख्या घटने की वजह सिर्फ सीधे तौर पर की गई छंटनी नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में कर्मचारियों का खुद नौकरी छोड़ना और उनकी जगह नई भर्तियां न होना भी एक बड़ा कारण है।
यानी TCS में जॉब कट्स दो तरीकों से हो रहे हैं। एक तरफ कंपनी परफॉर्मेंस या अन्य कारणों से कुछ कर्मचारियों को तय प्रक्रिया के तहत बाहर कर रही है, वहीं दूसरी ओर जो कर्मचारी खुद कंपनी छोड़ रहे हैं, उनकी जगह नई भर्तियां नहीं की जा रही हैं। इसका सीधा असर कंपनी की कुल हेडकाउंट पर पड़ रहा है।
अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में TCS की वर्कफोर्स 11,151 कर्मचारियों तक घट गई। दिसंबर के अंत तक कंपनी में कुल कर्मचारियों की संख्या घटकर 5,82,163 रह गई, जबकि पिछली तिमाही में यह आंकड़ा 5,93,314 था। यह लगातार दूसरी तिमाही है जब TCS ने कर्मचारियों की संख्या में शुद्ध गिरावट दर्ज की है।
पिछले छह महीनों की बात करें तो स्थिति और भी गंभीर नजर आती है। सितंबर तिमाही में जहां कंपनी ने करीब 19,755 कर्मचारियों की कटौती की थी, वहीं दिसंबर तिमाही को जोड़ दें तो कुल मिलाकर TCS ने लगभग 30,000 कर्मचारियों को खो दिया है। इसके साथ ही कंपनी की कुल वर्कफोर्स छह लाख से नीचे आ चुकी है, जो पिछले कई सालों में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
आईटी सेक्टर में आम धारणा यह बन चुकी है कि AI टूल्स जैसे Claude, Cursor और अन्य ऑटोमेशन टेक्नोलॉजी के चलते कंपनियां कर्मचारियों की संख्या घटा रही हैं। TCS को लेकर भी यही माना जा रहा है कि वह AI आधारित सिस्टम को अपनाकर कम लोगों में ज्यादा काम करवाने की दिशा में बढ़ रही है।
हालांकि, इस बीच ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की एक हालिया रिपोर्ट ने इस सोच पर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के महीनों में जो जॉब कट्स देखने को मिल रहे हैं, वे पूरी तरह से AI की वजह से नहीं हैं। कई कंपनियां इस मौके का इस्तेमाल कमजोर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को बाहर करने, टीम स्ट्रक्चर को बेहतर बनाने और लागत घटाने के लिए कर रही हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि AI को जॉब कट्स की वजह बताना कंपनियों के लिए एक तरह से मैसेज कंट्रोल का तरीका बन गया है, ताकि कर्मचारियों और आम जनता के बीच नकारात्मक प्रतिक्रिया को कम किया जा सके। हालांकि, यह भी साफ किया गया है कि TCS के मामले में ऐसा कोई ठोस संकेत नहीं है कि कंपनी जानबूझकर AI के नाम पर छंटनी कर रही है।
इन सबके बीच, TCS के कर्मचारियों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि कंपनी ने हाल ही में वर्क-फ्रॉम-ऑफिस को लेकर सख्त रुख अपनाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई कर्मचारियों के लिए ऑफिस में न्यूनतम उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। जो कर्मचारी इस नियम का पालन नहीं कर पा रहे हैं, उनके अप्रेज़ल रोके जा रहे हैं।
कुछ मामलों में यह भी सामने आया है कि टीम लेवल पर अप्रेज़ल पूरा होने के बावजूद सेंट्रल लेवल से उसे मंजूरी नहीं मिली। मीडिया द्वारा देखे गए आंतरिक ईमेल्स में कर्मचारियों को चेतावनी दी गई है कि अगर ऑफिस अटेंडेंस नियमों का पालन नहीं किया गया, तो वे 2026 के परफॉर्मेंस रेटिंग साइकिल से भी बाहर हो सकते हैं।
इस पूरी स्थिति ने TCS के भीतर अनिश्चितता का माहौल बना दिया है। एक तरफ लगातार घटती हेडकाउंट, दूसरी ओर जॉब सिक्योरिटी को लेकर सवाल और ऊपर से सख्त नीतियां—इन सबने कर्मचारियों के मन में डर और असमंजस बढ़ा दिया है।
फिलहाल TCS यह कहकर भरोसा दिलाने की कोशिश कर रही है कि वह किसी भी कर्मचारी के साथ अन्याय नहीं करेगी और हर फैसला तय नियमों के तहत ही लिया जाएगा। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि 2026 तक जॉब कट्स जारी रहने की संभावना ने आईटी सेक्टर में काम करने वालों की नींद उड़ा दी है।



