
ED Raid in Kolkata: पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर उबाल पर है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से कोलकाता के साल्ट लेक स्थित I-PAC कार्यालय और संगठन प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर की गई छापेमारी के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुलकर केंद्र सरकार के खिलाफ सामने आ गई हैं। गुरुवार सुबह हुई इस कार्रवाई के बाद ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुंचीं और करीब 45 मिनट तक I-PAC के दफ्तर में मौजूद रहीं।
मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर लिया। ममता ने कहा कि अगर भारतीय जनता पार्टी बंगाल में जीत हासिल करना चाहती है तो राजनीतिक लड़ाई लड़े, न कि जांच एजेंसियों के जरिए दबाव बनाए।
“राजनीतिक लड़ाई लड़िए, ED का सहारा क्यों?” — ममता का सवाल
I-PAC कार्यालय से बाहर निकलते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि यह पूरी कार्रवाई लोकतंत्र पर हमला है। उन्होंने कहा कि अमित शाह अगर बंगाल में सत्ता पाना चाहते हैं तो चुनावी मैदान में उतरें, न कि उनकी पार्टी के आईटी और रणनीतिक तंत्र पर छापे डलवाएं।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करते हुए कहा कि वे अपने गृहमंत्री को नियंत्रित करें। ममता ने यह भी चेतावनी दी कि अगर इसी तरह का रवैया जारी रहा तो भाजपा को बंगाल में एक भी सीट नहीं मिलेगी।
इससे पहले दिन में ममता बनर्जी अमित शाह को “खतरनाक और असंवेदनशील गृहमंत्री” तक कह चुकी थीं, जिससे साफ है कि राज्य और केंद्र के बीच टकराव किस स्तर तक पहुंच चुका है।
प्रतीक जैन के घर से I-PAC ऑफिस तक ममता की मौजूदगी
ED की छापेमारी की खबर मिलते ही ममता बनर्जी सबसे पहले प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट स्थित आवास पहुंचीं। वहां वह कुछ ही मिनट रुकीं और एक हरी फाइल लेकर बाहर निकलीं। ममता का आरोप है कि ED की टीम तृणमूल कांग्रेस से जुड़े सभी राजनीतिक और चुनावी दस्तावेज जब्त करने आई थी।
इसके बाद मुख्यमंत्री साल्ट लेक सेक्टर-V स्थित I-PAC कार्यालय पहुंचीं, जहां वह करीब 45 मिनट तक रहीं। ममता ने साफ कहा कि जब तक I-PAC प्रमुख प्रतीक जैन वहां नहीं पहुंचते, वह दफ्तर नहीं छोड़ेंगी।
“हमारी चुनावी रणनीति जब्त की जा रही है” — TMC का आरोप
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि ED ने ऐसे दस्तावेज अपने कब्जे में लिए हैं, जिनमें तृणमूल कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों, चुनावी रणनीति और अभियान से जुड़ी जानकारियां थीं। उनके अनुसार, फॉरेंसिक टीम के साथ आए अधिकारी दफ्तर से लगभग हर जरूरी फाइल ले गए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब जब तक पार्टी दोबारा अपनी रणनीति तैयार करेगी, तब तक चुनाव निकल जाएंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अनुरूप है।
I-PAC को लेकर ममता का स्पष्ट पक्ष
ममता बनर्जी ने यह भी साफ किया कि I-PAC कोई निजी संगठन नहीं है, बल्कि एक प्रोफेशनल राजनीतिक सलाहकार संस्था है, जिसे तृणमूल कांग्रेस ने अधिकृत किया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी एक पंजीकृत राजनीतिक दल है, जो आयकर भरती है, ऑडिट कराती है और उसके पास निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं।
मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि भाजपा के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई कभी क्यों नहीं होती। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा धनबल और बाहुबल के सहारे लोकतंत्र को कमजोर कर रही है।
चुनाव से पहले कार्रवाई पर उठे सवाल
यह पूरा मामला ऐसे समय सामने आया है, जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तैयारी चल रही है। संभावना है कि चुनाव अप्रैल-मई में कराए जा सकते हैं। इसके साथ ही चुनाव आयोग द्वारा चलाया जा रहा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान पहले से ही राज्य में राजनीतिक माहौल को तनावपूर्ण बना चुका है।
तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि ED की यह कार्रवाई उसी साजिश का हिस्सा है, जिसके जरिए चुनाव से पहले विपक्ष को कमजोर किया जा रहा है।
SIR से जुड़े दस्तावेज भी जब्त होने का दावा
ममता बनर्जी ने यह भी दावा किया कि ED की टीम उन सूचियों को भी ले गई, जो SIR अभियान से संबंधित थीं। उनके अनुसार, I-PAC पिछले कई महीनों से तृणमूल कार्यकर्ताओं के लिए SIR को लेकर ट्रेनिंग मॉड्यूल तैयार कर रहा था।
मुख्यमंत्री का कहना है कि यह कार्रवाई सुबह-सुबह उस समय की गई, जब दफ्तर में कोई मौजूद नहीं था, जिससे साफ है कि जानबूझकर पार्टी को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।
मौके पर बढ़ी सुरक्षा, वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे
जब ममता बनर्जी I-PAC कार्यालय में थीं, तब सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई। बिधाननगर की मेयर कृष्णा चक्रवर्ती, राज्य के अग्निशमन मंत्री सुजीत बोस, डीजीपी राजीव कुमार और नगर निगम के चेयरमैन सब्यसाची दत्ता भी मौके पर पहुंचे।
इस दौरान सुरक्षाकर्मियों को बड़ी संख्या में फाइलें ममता बनर्जी की गाड़ी में रखते हुए देखा गया, जिसने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया।
सड़कों पर उतरे TMC कार्यकर्ता
ED की छापेमारी के विरोध में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता कोलकाता के भवानीपुर इलाके समेत कई हिस्सों में सड़कों पर उतर आए। भवानीपुर ममता बनर्जी का विधानसभा क्षेत्र भी है।
मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि गुरुवार शाम 4 बजे से पूरे राज्य में इस कार्रवाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।
I-PAC और TMC का रिश्ता
I-PAC वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद से तृणमूल कांग्रेस के साथ काम कर रहा है। संगठन में लगभग 200 से 300 कर्मचारी हैं, जो राज्यभर में पार्टी के सांसदों, विधायकों और जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय बनाकर काम करते हैं।
पिछले छह वर्षों में I-PAC पार्टी और सरकार से जुड़े कई अहम फैसलों और उनके क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभाता रहा है, जिससे यह संस्था TMC की रणनीति का अहम हिस्सा बन चुकी है।
निष्कर्ष
ED की यह छापेमारी सिर्फ एक जांच कार्रवाई नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति में आने वाले चुनावों से पहले एक बड़ा राजनीतिक संकेत मानी जा रही है। ममता बनर्जी के तीखे तेवर यह साफ दिखाते हैं कि राज्य और केंद्र के बीच टकराव अब और तेज होने वाला है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मुद्दे पर राजनीतिक तापमान किस हद तक बढ़ता है और इसका असर विधानसभा चुनाव पर कितना पड़ता है।



