
Reliance Industries Share Fall: देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के शेयरों में मंगलवार को जोरदार गिरावट देखने को मिली। निवेशकों में चिंता उस वक्त बढ़ गई जब विश्लेषकों ने रिटेल सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को लेकर चेतावनी दी। मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली इस दिग्गज कंपनी के लिए रिटेल बिजनेस शेयर कीमत का एक बड़ा आधार माना जाता है, ऐसे में सेक्टर से जुड़ी नकारात्मक खबरों ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया।
मंगलवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर करीब 4.5 प्रतिशत गिरकर बंद हुए, जो जून 2024 के बाद एक दिन में आई सबसे बड़ी गिरावट है। इस तेज बिकवाली का असर सिर्फ रिलायंस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका दबाव देश के प्रमुख शेयर सूचकांकों पर भी दिखा। चूंकि रिलायंस का वजन इंडेक्स में काफी ज्यादा है, इसलिए भारतीय बाजार एशियाई बाजारों के मुकाबले पीछे रह गए।
इस गिरावट के चलते रिलायंस इंडस्ट्रीज के मार्केट कैप से 10 अरब डॉलर से ज्यादा की रकम साफ हो गई। बाजार मूल्य के हिसाब से देश की सबसे बड़ी कंपनी के लिए यह झटका निवेशकों के भरोसे को कमजोर करने वाला रहा।
दरअसल, रिटेल सेक्टर से आई एक रिपोर्ट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। टाटा ग्रुप की फास्ट-फैशन कंपनी ट्रेंट लिमिटेड ने दिसंबर तिमाही के नतीजों में बताया कि उसके स्टोर्स में प्रति वर्ग फुट औसत राजस्व में सालाना आधार पर 15 प्रतिशत की गिरावट आई है। यह संकेत करता है कि भारतीय रिटेल बाजार इस समय दबाव में है और उपभोक्ता मांग पूरी तरह मजबूत नहीं हो पाई है।
इसके अलावा, सिटीग्रुप (Citigroup) की रिपोर्ट में कहा गया कि रिटेल सेक्टर में तेज प्रतिस्पर्धा मौजूदा बड़ी कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी को कम कर रही है। इसी वजह से निवेशकों ने आशंका जताई कि इस माहौल का असर देश के सबसे बड़े रिटेलर रिलायंस रिटेल पर भी पड़ सकता है।
रिलायंस का रिटेल बिजनेस कंपनी के शेयर मूल्य का एक अहम स्तंभ माना जाता है। अक्टूबर में आई ICICI सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस के रिटेल कारोबार का मूल्यांकन 103 अरब डॉलर से अधिक किया गया था, जो कंपनी के कुल मार्केट कैप का लगभग आधा हिस्सा है। हालांकि यह यूनिट अभी सूचीबद्ध नहीं है, लेकिन सेक्टर से जुड़ी कमजोर खबरें निवेशकों के सेंटिमेंट को प्रभावित करती हैं।
इसी बीच एक और चिंता का विषय रिलायंस की रूसी कच्चे तेल पर निर्भरता को लेकर सामने आया। यूक्रेन युद्ध के बाद 2022 में भारत ने रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदना शुरू किया था, जिसमें रिलायंस की बड़ी भूमिका रही। अब बाजार में यह सवाल उठने लगे हैं कि अगर भविष्य में रूसी तेल की सप्लाई बाधित होती है, तो रिलायंस इसकी भरपाई कैसे करेगा।
हालांकि इन अटकलों पर रिलायंस इंडस्ट्रीज ने सफाई दी है। कंपनी ने मंगलवार शाम स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में कहा कि उसके शेयरों में हालिया गिरावट का ब्लूमबर्ग की रूसी तेल से जुड़ी रिपोर्ट से कोई संबंध नहीं है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि हाल के हफ्तों में उसके जामनगर रिफाइनरी को कोई रूसी तेल खेप नहीं मिली है। इससे पहले ब्लूमबर्ग ने रिपोर्ट किया था कि जिन रूसी तेल कार्गो को रिलायंस से जोड़ा जा रहा था, उन्हें कहीं और उतार दिया गया।
बाजार में बिकवाली का एक कारण मुनाफावसूली भी माना जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में रिलायंस के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी। साल 2025 में अब तक रिलायंस के शेयर करीब 29 प्रतिशत चढ़ चुके हैं, जबकि इसी अवधि में एनएसई निफ्टी 50 इंडेक्स में लगभग 11 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
रिलायंस के इस बेहतर प्रदर्शन के पीछे कंपनी के एनर्जी बिजनेस में सुधार अहम वजह रहा है। बेहतर ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन और चीन की तथाकथित एंटी-इनवोल्यूशन पॉलिसी से रिफाइनिंग सेक्टर को संभावित फायदे की उम्मीद ने शेयर को सहारा दिया था।
आगे की बात करें तो मॉर्गन स्टेनली ने 2026 के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज में कई ग्रोथ ट्रिगर्स गिनाए हैं। इनमें कंपनी की डिजिटल यूनिट जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ, टेलीकॉम टैरिफ में संभावित बढ़ोतरी और कच्चे तेल की कीमतें नरम रहने से रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार शामिल है।
इसके बावजूद कुछ जोखिम अभी भी बने हुए हैं। अमेरिका द्वारा भारत पर संभावित टैरिफ नीति, घरेलू बाजार में उपभोक्ता मांग की धीमी रिकवरी और ऊंचा वैल्यूएशन निवेशकों को सतर्क कर रहा है। फिलहाल रिलायंस के शेयर फॉरवर्ड अर्निंग्स के करीब 23 गुना पर कारोबार कर रहे हैं, जो पिछले पांच साल के औसत से ज्यादा है।
डीआरचोकसी फिनसर्व के मैनेजिंग डायरेक्टर देवेन चोकसी का कहना है कि अगर भारत को पूरी तरह रूसी तेल का रिफाइनिंग बंद करना पड़ा, तो इसका असर सिर्फ रिलायंस ही नहीं बल्कि सरकारी तेल कंपनियों पर भी पड़ेगा। यही अनिश्चितता शेयर बाजार पर दबाव बना रही है।
इस गिरावट का असर सरकारी रिफाइनिंग कंपनियों पर भी दिखा। भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के शेयरों में भी मुंबई बाजार में करीब 2 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई।
कुल मिलाकर, रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में आई यह गिरावट सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रिटेल सेक्टर की मौजूदा चुनौतियों, वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और बाजार वैल्यूएशन से जुड़ी चिंताओं को दर्शाती है। आने वाले महीनों में निवेशकों की नजर कंपनी की रणनीति, रिटेल और एनर्जी बिजनेस के प्रदर्शन और जियो आईपीओ जैसे बड़े घटनाक्रमों पर टिकी रहेगी।



