
US Attack on Venezuela: शनिवार को वैश्विक राजनीति में उस वक्त भूचाल आ गया, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को एक “बड़े पैमाने के ऑपरेशन” के तहत गिरफ्तार कर देश से बाहर ले जाया गया है। ट्रंप ने कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर की गई है और जल्द ही इससे जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।
इस दावे के कुछ ही समय बाद अमेरिकी अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी ने पुष्टि की कि न्यूयॉर्क में मादुरो और उनकी पत्नी के खिलाफ अभियोग दर्ज किया गया है। मादुरो पर नार्को-टेररिज्म साजिश, कोकीन तस्करी, मशीनगन और विनाशकारी हथियार रखने तथा अमेरिका के खिलाफ साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि सिलिया फ्लोरेस पर लगे आरोपों को लेकर अमेरिकी प्रशासन ने कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी।
वेनेजुएला में विस्फोट, हवाई हमले और ब्लैकआउट
इसी बीच वेनेजुएला की राजधानी कराकस समेत कई इलाकों से जोरदार धमाकों और सैन्य विमानों की असामान्य उड़ानों की खबरें सामने आईं। स्थानीय निवासियों द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो में धुएं के गुबार और तेज विस्फोट साफ देखे जा सकते हैं। कई इलाकों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई, जिससे हालात और भयावह हो गए।
बीबीसी वेरिफाई की पुष्टि के अनुसार, जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया, उनमें कराकस का ला कार्लोटा एयरबेस, ला गुएरा बंदरगाह और हिगुएरोटे एयरपोर्ट शामिल हैं। विस्फोटों की आवाजें शनिवार तड़के करीब 2 बजे के बाद सुनाई देने लगी थीं, जिसने लोगों को नींद से जगा दिया।
कराकस में रहने वाली पत्रकार वनेसा सिल्वा ने बताया कि विस्फोट बिजली गिरने से भी ज्यादा तेज था। उनके मुताबिक, पूरा अपार्टमेंट हिल गया और डर के मारे दिल की धड़कनें तेज हो गईं।
वेनेजुएला सरकार का पलटवार
वेनेजुएला सरकार ने अमेरिका पर सीधे तौर पर “सैन्य आक्रमण” का आरोप लगाया है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि यह हमला न केवल वेनेजुएला की संप्रभुता पर सीधा हमला है, बल्कि पूरे लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र की शांति को खतरे में डालता है।
सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस “अवैध आक्रामकता” की निंदा करने की अपील की और कहा कि यह एक औपनिवेशिक युद्ध थोपने की कोशिश है, जिसका मकसद सत्ता परिवर्तन कराना है। राष्ट्रपति मादुरो की स्थिति को लेकर हालांकि कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई, लेकिन देशभर में “बाहरी आपात स्थिति” लागू करने का ऐलान किया गया है।
वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने अमेरिका से मादुरो और उनकी पत्नी के “प्रूफ ऑफ लाइफ” की मांग की। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान किया जाए और इस “क्रूर हमले” के लिए अमेरिका को जवाबदेह ठहराया जाए।
अमेरिका का रुख और बढ़ता तनाव
अमेरिका लंबे समय से मादुरो सरकार को अवैध मानता रहा है और उस पर ड्रग तस्करी से जुड़े नेटवर्क चलाने का आरोप लगाता रहा है। हाल के महीनों में अमेरिका ने कैरेबियाई क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई थी, जिससे यह संकेत मिल रहे थे कि दोनों देशों के बीच टकराव किसी भी वक्त खुली लड़ाई में बदल सकता है।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अंडर सेक्रेटरी क्रिस्टोफर लैंडाउ ने सोशल मीडिया पर लिखा कि “वेनेजुएला के लिए एक नया सवेरा” शुरू हो गया है और अब “तानाशाह को उसके अपराधों की सजा मिलेगी।” इस बयान ने आग में घी डालने का काम किया।
दुनिया भर से प्रतिक्रियाएं
इस घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई और संयम बरतने की अपील की।
क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल ने अमेरिका की कार्रवाई को “आपराधिक हमला” बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। रूस ने भी अमेरिका के कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे सशस्त्र आक्रामकता करार दिया और संवाद के जरिए समाधान खोजने की बात कही।
वहीं यूरोप से स्पेन ने तनाव कम करने की अपील की और कहा कि वह इस संकट के शांतिपूर्ण समाधान के लिए मध्यस्थता को तैयार है। स्पेन ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का पालन हर हाल में होना चाहिए।
जनता से संयम की अपील
वेनेजुएला के गृह मंत्री डियोसडाडो काबेलो ने देशवासियों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह पहला मौका नहीं है जब वेनेजुएला को इस तरह की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है और देश ने पहले भी ऐसे हालात से उबरना सीखा है।
हालांकि, सड़कों पर डर और अनिश्चितता का माहौल साफ देखा जा सकता है। लोग यह जानने को बेचैन हैं कि राष्ट्रपति मादुरो वास्तव में कहां हैं और आगे देश की सत्ता का क्या होगा।
आगे क्या?
फिलहाल स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। अमेरिका और वेनेजुएला के बीच टकराव अब केवल कूटनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा। सैन्य कार्रवाई, गिरफ्तारी के दावे और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं ने इसे एक वैश्विक संकट में बदल दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही संवाद का रास्ता नहीं अपनाया गया, तो इसका असर सिर्फ वेनेजुएला ही नहीं बल्कि पूरे लैटिन अमेरिका और वैश्विक राजनीति पर पड़ेगा। आने वाले दिन तय करेंगे कि यह संकट युद्ध की ओर जाएगा या कूटनीति से सुलझेगा।



