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नए साल की शानदार शुरुआत: 3 जनवरी को दिखेगा Wolf Supermoon, आम चांद से 30% ज्यादा चमकदार

नए साल 2026 की शुरुआत आसमान में एक बेहद खास और खूबसूरत नज़ारे के साथ होने जा रही है। भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के आसमान प्रेमियों और खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए Wolf Supermoon एक यादगार अनुभव बनने वाला है। 3 जनवरी 2026 को पूर्णिमा के दिन चांद सामान्य से कहीं ज्यादा बड़ा और ज्यादा चमकदार दिखाई देगा, जो नए साल की पहली खगोलीय सौगात होगी।

यह नज़ारा सिर्फ वैज्ञानिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि देखने में भी बेहद आकर्षक होगा। खुले आसमान के नीचे खड़े होकर जब लोग चांद को निहारेंगे, तो उन्हें लगेगा मानो चांद धरती के और करीब आ गया हो। यही वजह है कि Supermoon को लेकर हर साल लोगों में खास उत्साह देखने को मिलता है, और 2026 का यह Wolf Supermoon तो खास तौर पर चर्चा में है।

दरअसल, Supermoon तब होता है जब चांद अपनी कक्षा में पृथ्वी के सबसे नज़दीकी बिंदु पर होता है और उसी समय पूर्णिमा भी होती है। चांद की कक्षा पूरी तरह गोल नहीं होती, बल्कि अंडाकार होती है। इसी वजह से कभी वह पृथ्वी से ज्यादा दूर होता है और कभी ज्यादा पास। जब चांद सबसे पास होता है, तो इस स्थिति को पेरीजि (Perigee) कहा जाता है, और जब वह सबसे दूर होता है, तो उसे एपोजी (Apogee) कहते हैं।

3 जनवरी 2026 को चांद पेरीजि की स्थिति में होगा और उस समय वह पृथ्वी से लगभग 3,56,500 किलोमीटर की दूरी पर रहेगा। इतनी नज़दीकी की वजह से चांद आम दिनों की तुलना में करीब 14 प्रतिशत बड़ा और लगभग 30 प्रतिशत ज्यादा चमकदार दिखाई देगा। यही कारण है कि इस खगोलीय घटना को Supermoon कहा जाता है।

इस Supermoon को Wolf Moon भी कहा जाता है। इस नाम की जड़ें प्राचीन लोककथाओं और परंपराओं में मिलती हैं। माना जाता है कि सर्दियों के चरम समय में भेड़िए (Wolves) ज्यादा जोर से और ज्यादा बार हुआं-हुआं करते थे। इसी वजह से जनवरी की पूर्णिमा को Wolf Moon कहा जाने लगा। समय के साथ यह नाम खगोल विज्ञान की दुनिया में भी लोकप्रिय हो गया।

2026 का Wolf Supermoon इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि यह पेरीहेलियन (Perihelion) के आसपास घटित हो रहा है। पेरीहेलियन वह स्थिति होती है जब पृथ्वी सूर्य के सबसे नज़दीक होती है। जब Supermoon और पेरीहेलियन एक ही समय के आसपास होते हैं, तो समुद्र में ज्वार-भाटा थोड़ा ज्यादा प्रभावशाली हो सकता है। हालांकि इसका असर मुख्य रूप से तटीय इलाकों और समुद्री गतिविधियों तक ही सीमित रहता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, इस तरह की खगोलीय स्थितियों का पृथ्वी पर कोई खतरनाक प्रभाव नहीं पड़ता, लेकिन देखने के लिहाज़ से यह नज़ारा बेहद शानदार होता है। यही वजह है कि खगोल प्रेमी इसे दशक के सबसे खूबसूरत चंद्र दृश्यों में से एक मान रहे हैं।

भारत में रहने वाले लोगों के लिए इस Wolf Supermoon को देखने का सबसे अच्छा समय 3 जनवरी की शाम को होगा। तकनीकी रूप से चांद अपनी पूर्ण चमक दोपहर बाद प्राप्त करेगा, लेकिन उस समय चांद आसमान में दिखाई नहीं देता। असली आनंद तो तब आता है, जब चांद क्षितिज से ऊपर उगता है।

भारतीय समय के अनुसार, चांद करीब शाम 5:45 बजे पूर्व दिशा से उगता हुआ दिखाई देगा। इस समय एक खास दृश्य प्रभाव देखने को मिलेगा, जिसे Moon Illusion कहा जाता है। इस भ्रम में इंसानी दिमाग चांद को असल से कहीं ज्यादा बड़ा समझने लगता है, खासकर जब वह इमारतों, पेड़ों या पहाड़ियों के पास दिखाई देता है।

इस अद्भुत नज़ारे को देखने के लिए आपको किसी महंगे टेलीस्कोप या खास उपकरण की जरूरत नहीं है। बस एक ऐसी जगह चुनें जहां पूर्व दिशा का नज़ारा साफ हो और आस-पास ज्यादा रोशनी न हो। बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु में लाइट पॉल्यूशन की वजह से दृश्य थोड़ा कम प्रभावी हो सकता है, लेकिन फिर भी चांद की चमक इतनी ज्यादा होगी कि वह साफ दिखाई देगा।

जनवरी के महीने में भारत के ज्यादातर हिस्सों में आसमान साफ रहता है, जो इस खगोलीय घटना को देखने के लिए एकदम सही माहौल बनाता है। ठंडी रात, साफ आसमान और चमकता हुआ विशाल चांद—यह अनुभव अपने आप में बेहद खास होगा।

खगोल विशेषज्ञों के अनुसार, 2026 में कुल तीन Supermoon देखने को मिलेंगे। इनमें से सबसे बड़ा और पृथ्वी के सबसे ज्यादा नज़दीक Supermoon 24 दिसंबर 2026 को दिखाई देगा। लेकिन साल की शुरुआत में दिखने वाला यह Wolf Supermoon अपने नाम और समय की वजह से अलग ही पहचान बना रहा है।

आज के डिजिटल दौर में भी ऐसे खगोलीय नज़ारे हमें प्रकृति से जुड़ने का मौका देते हैं। मोबाइल कैमरे और सोशल मीडिया के ज़रिए लोग इस Supermoon की तस्वीरें और वीडियो साझा करेंगे, जिससे यह नज़ारा और भी ज्यादा चर्चा में रहेगा।

कुल मिलाकर, 3 जनवरी 2026 का Wolf Supermoon न सिर्फ खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए, बल्कि आम लोगों के लिए भी एक खास अनुभव होगा। यह हमें याद दिलाता है कि भागदौड़ भरी ज़िंदगी के बीच कभी-कभी आसमान की ओर देखकर प्रकृति के इन चमत्कारों का आनंद लेना कितना सुकून देता है।

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