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Khaleda Zia Funeral: ढाका में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार, जयशंकर रहे मौजूद

Khaleda Zia Funeral: बांग्लादेश की राजनीति की एक मजबूत और प्रभावशाली आवाज रहीं पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को बुधवार को ढाका में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। 80 वर्षीय खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में देश-विदेश से हजारों लोग शामिल हुए, जिनमें आम नागरिकों के साथ-साथ कई शीर्ष राजनीतिक नेता और विदेशी प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। इस मौके पर भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर की मौजूदगी ने इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक दृष्टि से भी बेहद अहम बना दिया।

खालिदा जिया, जो बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की प्रमुख नेता थीं और तीन बार देश की प्रधानमंत्री रहीं, को ढाका के शेर-ए-बांग्ला नगर इलाके में उनके पति और बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान के बगल में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। यह वही स्थान है, जहां बांग्लादेश की संसद भी स्थित है और जिसे देश के राजनीतिक इतिहास का केंद्र माना जाता है।

ठंड के बीच भावुक माहौल, नम आंखों से दी गई विदाई

बुधवार को ढाका में ठंड के बावजूद हर वर्ग के लोग अंतिम दर्शन और नमाज में शामिल होने पहुंचे। जैसे ही खालिदा जिया का पार्थिव शरीर राष्ट्रीय ध्वज में लिपटे ताबूत में मणिक मिया एवेन्यू के पश्चिमी छोर पर रखा गया, माहौल पूरी तरह भावुक हो गया। लोग रोते-बिलखते नजर आए और दिवंगत नेता की आत्मा की शांति के लिए दुआ करते दिखे।

अंतिम संस्कार के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। राजकीय सम्मान के तहत हुए इस कार्यक्रम में आम जनता को दफन के समय शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई, क्योंकि पूरा आयोजन सरकारी प्रोटोकॉल के अनुसार संपन्न किया गया।

एस जयशंकर ने सौंपा प्रधानमंत्री मोदी का शोक संदेश

अंतिम संस्कार से पहले भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने खालिदा जिया के बेटे और बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भेजा गया शोक संदेश उन्हें सौंपा। तारिक रहमान को बांग्लादेश की राजनीति में एक उभरता हुआ चेहरा माना जाता है और उन्हें भविष्य का प्रधानमंत्री भी बताया जा रहा है।

जयशंकर की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में बीते कुछ महीनों से ठंडापन देखा जा रहा है। इस लिहाज से इसे नई दिल्ली की ओर से ढाका के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय नेताओं की भी रही मौजूदगी

खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में केवल भारत ही नहीं, बल्कि कई दक्षिण एशियाई देशों के शीर्ष नेता भी शामिल हुए। नेपाल के विदेश मंत्री बाला नंद शर्मा, भूटान के विदेश मंत्री ल्योंपो डीएन धुंग्येल, श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिता हेराथ और मालदीव के उच्च शिक्षा एवं श्रम मंत्री अली हैदर अहमद भी ढाका पहुंचे।

इन सभी नेताओं की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि खालिदा जिया का राजनीतिक प्रभाव सिर्फ बांग्लादेश तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में उनकी पहचान थी।

पाकिस्तान के नेता से भी हुई जयशंकर की मुलाकात

ढाका प्रवास के दौरान एस जयशंकर ने पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के स्पीकर सरदार अयाज सादिक से भी मुलाकात की और औपचारिक अभिवादन किया। इस मुलाकात की एक तस्वीर बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से साझा की गई। हालांकि, जयशंकर या सादिक की ओर से इस बैठक को लेकर कोई पोस्ट नहीं की गई।

इस मुलाकात को भी क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब दक्षिण एशिया में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।

भारत-बांग्लादेश रिश्तों के बीच अहम दौरा

जयशंकर का ढाका दौरा ऐसे वक्त पर हुआ है, जब भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तनाव की खबरें सामने आ रही हैं। शेख हसीना, जिन्हें भारत का करीबी सहयोगी माना जाता था, के सत्ता से बाहर होने के बाद दोनों देशों के संबंधों में पहले जैसी गर्मजोशी नहीं दिख रही है।

इसके अलावा बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों को लेकर भारत ने कई बार चिंता जाहिर की है। ऐसे में जयशंकर की मौजूदगी को नई दिल्ली की ओर से संवाद बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

खालिदा जिया का राजनीतिक सफर

खालिदा जिया बांग्लादेश की राजनीति की सबसे प्रभावशाली महिलाओं में गिनी जाती थीं। उन्होंने पहली बार 1991 से 1996 तक प्रधानमंत्री के रूप में देश का नेतृत्व किया। इसके बाद फरवरी 1996 में कुछ हफ्तों के लिए दूसरी बार सत्ता संभाली और फिर 2001 से 2006 तक उनका तीसरा कार्यकाल रहा।

उनका नेतृत्व अक्सर शेख हसीना की अगुवाई वाली अवामी लीग की नीतियों के विपरीत माना जाता था, खासकर भारत के साथ संबंधों के मामले में।

चीन के साथ मजबूत रिश्ते, भारत से दूरी

अपने कार्यकाल के दौरान खालिदा जिया ने बांग्लादेश के चीन के साथ रिश्तों को मजबूत किया। उनके शासनकाल में ढाका और बीजिंग के बीच सैन्य और रणनीतिक सहयोग बढ़ा, जिससे चीन बांग्लादेश का सबसे बड़ा सैन्य उपकरण आपूर्तिकर्ता बन गया।

यह रुख नई दिल्ली को अक्सर असहज करता रहा और यही वजह रही कि खालिदा जिया को भारत समर्थक राजनीति के विकल्प के रूप में देखा जाता था।

मौजूदा हालात और आगे की राजनीति

अगस्त 2024 में मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद से भारत-बांग्लादेश संबंधों में और तनाव देखने को मिला है। अल्पसंख्यकों पर हमलों और राजनीतिक अस्थिरता ने इन रिश्तों को और जटिल बना दिया है।

ऐसे माहौल में खालिदा जिया का निधन और उनका राजकीय अंतिम संस्कार केवल एक नेता की विदाई नहीं, बल्कि दक्षिण एशियाई राजनीति के एक अहम अध्याय का अंत माना जा रहा है।

निष्कर्ष

खालिदा जिया का जाना बांग्लादेश की राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति है। उनका जीवन संघर्ष, सत्ता, विवाद और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति से भरा रहा। उनके अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़ और विदेशी नेताओं की मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि उनका प्रभाव सीमाओं से परे था।

अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि बांग्लादेश की राजनीति आगे किस दिशा में जाती है और भारत-बांग्लादेश संबंधों में यह बदलाव क्या नया मोड़ लाता है।

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