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IndiGo Flight Cancellation News: मंत्री राम मोहन नायडू ने बताया ‘घोर कुप्रबंधन’ | FDTL नियम

IndiGo Flight Cancellation News: देशभर में सैकड़ों IndiGo फ्लाइट्स के अचानक रद्द होने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में हवाई यात्रा बुरी तरह प्रभावित हुई और एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस पूरे घटनाक्रम के कुछ दिन बाद अब केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने खुलकर IndiGo को इस संकट के लिए जिम्मेदार ठहराया है।

Agenda AajTak कार्यक्रम में बातचीत के दौरान मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि यह संकट किसी बाहरी वजह से नहीं, बल्कि IndiGo के “घोर कुप्रबंधन” का नतीजा था। उन्होंने कहा कि अगर एयरलाइन ने समय रहते अपने आंतरिक सिस्टम को ठीक किया होता, तो यात्रियों को इस तरह की परेशानी नहीं झेलनी पड़ती।

‘इंडिगो की आंतरिक व्यवस्थाएं फेल रहीं’

राम मोहन नायडू ने बताया कि IndiGo को अपने क्रू रोस्टरिंग सिस्टम में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा। यह दिक्कतें उस समय सामने आईं, जब नवंबर 2025 से लागू हुए Flight Duty Time Limitation (FDTL) के नए नियमों के तहत एयरलाइंस को अपने पायलट और क्रू की ड्यूटी शेड्यूलिंग करनी थी।

मंत्री के मुताबिक, इंडिगो इन नए नियमों के मुताबिक खुद को ठीक से तैयार नहीं कर पाई। नतीजा यह हुआ कि 3 और 4 दिसंबर को फ्लाइट कैंसिलेशन की एक “डोमिनो इफेक्ट” जैसी स्थिति बन गई, जिसमें एक के बाद एक उड़ानें रद्द होती चली गईं।

संकट टल सकता था, लेकिन…

मंत्री ने यह भी कहा कि यह पूरा संकट पूरी तरह से टाला जा सकता था। उन्होंने इसे “चौंकाने वाला” बताते हुए कहा कि IndiGo जैसी अनुभवी एयरलाइन से ऐसी गलती की उम्मीद नहीं थी।

उनका कहना था कि एयरलाइन जो भी कारण गिना रही है, वे संतोषजनक नहीं लगते। सरकार केवल एयरलाइन के बयान पर निर्भर नहीं है, बल्कि DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) के जरिए पूरे मामले की स्वतंत्र और गहन जांच कराई जा रही है।

सरकार और DGCA पर सवालों का जवाब

जब मंत्री से पूछा गया कि क्या सरकार या DGCA इस संकट को पहले भांपने में नाकाम रही, तो उन्होंने साफ किया कि FDTL नियम 1 नवंबर से लागू हो चुके थे और मंत्रालय लगातार एयरलाइन के संपर्क में था।

उन्होंने बताया कि शुरुआती कुछ दिनों में मामूली कैंसिलेशन के बाद एक ऐसा दौर भी आया जब कोई उड़ान रद्द नहीं हुई। इससे यह संकेत मिला कि एयरलाइन स्थिति को संभालने में सक्षम है। लेकिन इसके बावजूद अचानक इतना बड़ा संकट खड़ा हो जाना कई सवाल खड़े करता है।

1 दिसंबर की अहम बैठक

राम मोहन नायडू ने खुलासा किया कि 1 दिसंबर को मंत्रालय और IndiGo के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी। इस बैठक में एयरलाइन से सीधे पूछा गया था कि क्या उन्हें नए FDTL नियमों को लेकर कोई समस्या है।

मंत्री के मुताबिक, उस समय IndiGo प्रबंधन ने यह नहीं बताया कि उन्हें किसी तरह की दिक्कत हो रही है। उन्होंने कहा कि अगर एयरलाइन समय रहते अपनी समस्याएं साझा करती, तो सरकार समाधान निकालने में मदद कर सकती थी।

‘सरकार हर छोटी चीज नहीं संभाल सकती’

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार एक रेगुलेटर की भूमिका निभाती है और पूरे एविएशन सेक्टर की निगरानी करती है, लेकिन किसी एयरलाइन के रोजमर्रा के आंतरिक संचालन की जिम्मेदारी उसके प्रबंधन की होती है।

उन्होंने दो टूक कहा कि अगर सरकार को एयरलाइन की हर छोटी-बड़ी ऑपरेशनल चीज में दखल देना पड़े, तो फिर किसी भी कंपनी के सीनियर मैनेजमेंट का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।

FDTL नियमों पर भी बोले मंत्री

राम मोहन नायडू ने कहा कि नए पायलट थकान नियम (FDTL norms) यात्रियों और क्रू की सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। उन्होंने बताया कि देश की बाकी सभी एयरलाइंस इन नियमों का पालन कर रही हैं और IndiGo ने भी पहले कहा था कि उन्हें इनसे कोई दिक्कत नहीं है।

मंत्री ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर कोई एयरलाइन नियमों को मानने की बात कहे और बाद में इस तरह का संकट खड़ा हो जाए, तो यह गंभीर लापरवाही का संकेत है।

IndiGo चेयरमैन के बयान पर प्रतिक्रिया

IndiGo के चेयरमैन विक्रम सिंह मेहता द्वारा जारी किए गए वीडियो बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री ने कहा कि वह कई मूल सवालों का जवाब देने में नाकाम रहा।

मंत्री ने खासतौर पर पिछले छह महीनों से कॉकपिट क्रू की भर्ती पर लगी रोक का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि जब एयरलाइन को पता था कि नए नियम लागू होने वाले हैं, तो पायलटों की भर्ती क्यों नहीं की गई।

यात्रियों को सूचना न देने पर नाराजगी

राम मोहन नायडू ने यात्रियों को समय पर जानकारी न देने के लिए भी IndiGo की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि अगर एयरलाइन को पहले से अंदेशा था कि वह ऑपरेशंस संभाल नहीं पाएगी, तो यात्रियों को एयरपोर्ट बुलाने से पहले ही सूचना दी जानी चाहिए थी।

उनके मुताबिक, यात्रियों को बिना जानकारी दिए एयरपोर्ट तक आने के लिए मजबूर करना बेहद गैर-जिम्मेदाराना रवैया है।

सख्त कार्रवाई के संकेत

जब मंत्री से पूछा गया कि अगर जांच में यह साबित होता है कि IndiGo प्रबंधन की लापरवाही या अक्षमता की वजह से संकट पैदा हुआ, तो क्या कार्रवाई होगी, इस पर उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी जरूरी कदम से पीछे नहीं हटेगी

उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत होगी, लेकिन अगर सीनियर मैनेजमेंट की अक्षमता सामने आती है, तो सख्त कार्रवाई तय है।

UDAN योजना और एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर

इस बातचीत में मंत्री ने देश के कई एयरपोर्ट्स के कम उपयोग को लेकर उठ रहे सवालों का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सरकार भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही है।

उन्होंने यह भी घोषणा की कि UDAN योजना को अगले 10 वर्षों तक बढ़ाया जाएगा, ताकि टियर-2 और टियर-3 शहरों में हवाई कनेक्टिविटी मजबूत हो सके। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि इस समय सबसे बड़ी चुनौती विमानों की उपलब्धता है।

IndiGo चेयरमैन की यात्रियों से माफी

इस बीच, बुधवार को IndiGo चेयरमैन विक्रम सिंह मेहता ने एक वीडियो संदेश जारी कर यात्रियों से माफी मांगी। उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि एयरलाइन ने जानबूझकर संकट पैदा नहीं किया और न ही नए नियमों से बचने की कोई साजिश रची।

उन्होंने बताया कि 3 से 5 दिसंबर के बीच जो हुआ, वह कई छोटे-छोटे कारणों की वजह से बना एक अप्रत्याशित घटनाक्रम था, जिसमें मौसम, विंटर शेड्यूल और नेटवर्क कंजेशन जैसी समस्याएं शामिल थीं।

IndiGo ने कहा कि वह अब बाहरी तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से पूरे मामले की जांच करेगी, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।

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