
2024 भारत के इतिहास में वह साल बन गया है, जब तापमान ने सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए और चरम मौसमीय घटनाओं ने लोगों के जीवन, कृषि, बिजली और अर्थव्यवस्था को गहराई से प्रभावित किया। ब्राज़ील के बेलेम में आयोजित COP30 के दौरान जारी दो स्वतंत्र रिपोर्टों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत का जलवायु संकट अब केवल चेतावनी नहीं, बल्कि एक कठोर वास्तविकता बन चुका है। इन रिपोर्टों ने 2024 और 2025 के शुरुआती नौ महीनों के मौसमीय रुझानों का अध्ययन करते हुए कई गंभीर तथ्य सामने रखे हैं, जिनका प्रभाव आने वाले वर्षों में और भी बढ़ सकता है।
भारत में 2024 बना अब तक का सबसे गर्म साल
क्लाइमेट ट्रेंड्स और क्लाइमेट कम्पैटिबल फ्यूचर्स द्वारा तैयार की गई पहली रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले दस वर्षों में भारत में अधिकतम तापमान 0.1°C से 0.5°C तक बढ़ा है, लेकिन 2024 ने नई ऊँचाइयों को छू लिया। रिपोर्ट के अनुसार 2024 का औसत तापमान 1991–2020 के आधार वर्ष से 0.65°C अधिक रहा, जो कि 2016 के रिकॉर्ड को भी पार कर गया। यह तापमान वृद्धि बताती है कि गर्मी केवल बढ़ नहीं रही, बल्कि लगातार नए खतरनाक स्तर भी छू रही है।
दिल्ली से पंजाब तक: उत्तर भारतीय राज्यों में तापमान के नए रिकॉर्ड
2024 के दौरान उत्तर भारत के राज्यों – विशेष रूप से दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा – ने सबसे तीव्र गर्मी का सामना किया। कई स्टेशनों पर तापमान 45°C से ऊपर पहुंचा, जबकि दिल्ली के मुंगेशपुर में 52.3°C का अभूतपूर्व तापमान दर्ज किया गया। यह वह आंकड़ा है जिसने न केवल वैज्ञानिकों को चौंकाया, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि भारत में हीटवेव की तीव्रता लगातार बढ़ रही है।
इंडो-गैंगेटिक प्लेन (IGP) क्षेत्र, जो पहले से ही गर्मी के प्रति संवेदनशील माना जाता है, ने 2024 में लगातार तापमान उछाल दर्ज किए। शहरी क्षेत्रों में हीट आइलैंड प्रभाव ने स्थिति को और भी खराब किया।
पहाड़ों पर भी बढ़ रहा खतरा: उत्तराखंड और लद्दाख में रिकॉर्ड तापमान वृद्धि
रिपोर्ट का एक और चौंकाने वाला पहलू यह था कि पारंपरिक रूप से ठंडे राज्यों — जैसे उत्तराखंड और लद्दाख — में गर्मियों का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ा।
-
उत्तराखंड में 11.2% की वृद्धि
-
लद्दाख में 9.1% की वृद्धि
यह संकेत देता है कि जलवायु परिवर्तन केवल मैदानी इलाकों तक सीमित नहीं है। हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ती गर्मी ग्लेशियर पिघलने, जल संसाधनों की कमी और भूस्खलन जैसी आपदाओं को और गंभीर बना सकती है।
गर्मी बढ़ी तो बिजली संकट भी गहराया
रिपोर्ट में बताया गया है कि अप्रैल से जून 2024 के बीच, जब देश भयंकर हीटवेव की चपेट में रहा, बिजली की मांग 9% बढ़ गई। देश के कई हिस्सों में लोड शेडिंग और अनियोजित बिजली कटौती का सामना करना पड़ा, जिससे घरेलू जीवन के साथ उद्योगों और सेवाओं पर भी असर पड़ा।
क्लाइमेट ट्रेंड्स की निदेशक आरती खोसला का कहना है,
“भारत की हीटवेव और बिजली की कमी अब दो अलग-अलग संकट नहीं रह गए हैं। दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। इस संकट से निपटने का एकमात्र रास्ता है – बिजली ग्रिड में सुधार, ऊर्जा भंडारण को बढ़ावा और जलवायु-लचीला बिजली ढांचा तैयार करना।”
यह बयान दर्शाता है कि भारत को ऊर्जा संक्रमण, स्मार्ट ग्रिड और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में तेज़ी से कदम बढ़ाने की आवश्यकता है।
दूसरी रिपोर्ट: 2025 में चरम मौसमीय आपदाओं का भयावह रूप
दिल्ली स्थित सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) द्वारा तैयार की गई दूसरी रिपोर्ट ने 2025 के पहले नौ महीनों में देश की आपदा स्थिति का विश्लेषण प्रस्तुत किया। रिपोर्ट के अनुसार भारत ने जनवरी से सितंबर 2025 के बीच 99% दिनों में किसी न किसी चरम मौसमीय घटना का सामना किया।
इन घटनाओं में शामिल थे:
-
हीटवेव और कोल्ड वेव
-
भारी बारिश
-
बाढ़
-
आंधी-तूफान
-
बिजली गिरना
-
भूस्खलन
2025 में अब तक का भारी नुकसान
रिपोर्ट बताती है कि इन आपदाओं में:
-
4,064 लोगों की मौत हुई
-
9.47 लाख हेक्टेयर फसलें नष्ट हुईं
-
लगभग 58,982 पशुओं की मौत हुई
-
99,533 घर पूरी तरह या आंशिक रूप से नष्ट हुए
यह आंकड़े दर्शाते हैं कि चरम मौसमीय घटनाएँ केवल प्राकृतिक आपदाएँ नहीं, बल्कि मानव जीवन, कृषि, पशुपालन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे पर गहरा असर डालती हैं।
2024 की तुलना में स्थिति और खराब
तुलनात्मक रूप से 2024 में ऐसी आपदाएँ 255 दिनों तक दर्ज की गई थीं, जिनमें:
-
3,238 मौतें हुईं
-
3.2 मिलियन हेक्टेयर फसलों को नुकसान पहुंचा
2025 में आपदाओं की संख्या और पैमाना दोनों तेजी से बढ़े, जो स्पष्ट रूप से जलवायु परिवर्तन की गति का संकेत देता है।
भारत के सामने बढ़ती जलवायु चुनौतियाँ
दोनों रिपोर्टें इस बात पर जोर देती हैं कि भारत अब “जलवायु परिवर्तन के प्रभावों” को भविष्य का खतरा नहीं मान सकता। यह वर्तमान की वास्तविकता है। बढ़ते तापमान, अनियंत्रित शहरीकरण, ऊर्जा संकट, आपदा प्रबंधन की कमियाँ और बुनियादी ढांचे पर दबाव — ये सब मिलकर आने वाले वर्षों को और चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं।
क्या करना होगा?
-
बिजली ग्रिड का आधुनिकीकरण
-
ऊर्जा भंडारण क्षमता बढ़ाना
-
नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को तेज़ी से अपनाना
-
जलवायु-लचीली कृषि पद्धतियाँ विकसित करना
-
शहरी क्षेत्रों में हीट एक्शन प्लान लागू करना
-
आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत करना
निष्कर्ष
COP30 के दौरान जारी इन दोनों रिपोर्टों ने भारत के सामने खड़ी जलवायु चुनौतियों की गंभीरता को और स्पष्ट कर दिया है। 2024 और 2025 की शुरुआत के मौसमीय आंकड़ों ने यह साबित कर दिया कि भारत हर साल नए तापमान रिकॉर्ड, बढ़ते बिजली संकट, और चरम मौसमीय घटनाओं के लगातार हमलों का सामना कर रहा है। यह समय है कि देश जलवायु अनुकूल नीतियों, मजबूत ऊर्जा ढाँचे और आपदा तैयारियों को प्राथमिकता दे, ताकि आगे आने वाली चुनौतियों का सामना मजबूती से किया जा सके।



