
नौगाम पुलिस स्टेशन धमाका: जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर के बाहरी इलाके में स्थित नौगाम पुलिस स्टेशन में शुक्रवार देर रात हुए भीषण विस्फोट ने पूरे प्रदेश को दहला कर रख दिया। यह धमाका उस समय हुआ जब जांच एजेंसियां “व्हाइट-कालर टेरर मॉड्यूल” केस में बरामद किए गए भारी मात्रा में विस्फोटकों के नमूने लेने की प्रक्रिया में थीं। इस हादसे ने न सिर्फ पुलिस विभाग को बड़ी क्षति पहुंचाई, बल्कि आसपास के कई मकानों और दुकानों को भी गंभीर नुकसान हुआ। हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि 32 से अधिक लोग घायल हो गए।
शनिवार (15 नवंबर 2025) को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार इस दुखद घड़ी में पूरी मजबूती से लोगों के साथ खड़ी है और किसी को भी अकेला महसूस नहीं होने दिया जाएगा।
सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है: CM उमर अब्दुल्ला
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपने आधिकारिक ‘X’ हैंडल पर पोस्ट करते हुए कहा कि नौगाम पुलिस स्टेशन में हुआ हादसा अत्यंत दुखद और पीड़ादायक है। उन्होंने बताया कि सरकार मृतकों के परिजनों को पूर्ण सहायता देगी और घायलों के इलाज में किसी भी तरह की कमी नहीं आने दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य मंत्री सकीना इत्तू को निर्देश दिए हैं कि अस्पतालों में भर्ती सभी घायलों का बेहतरीन इलाज सुनिश्चित किया जाए और ज़रूरत पड़ने पर उन्हें उन्नत चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएं।
उमर अब्दुल्ला ने कहा,
“जो परिवार अपने प्रियजनों को खो चुके हैं, सरकार उनके साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। यह बहुत बड़ी त्रासदी है और सरकार हर प्रकार की सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही आसपास के जिन घरों, दुकानों या इमारतों को नुकसान पहुंचा है, उन्हें उचित मुआवज़ा दिया जाएगा।”
उनके इस बयान के बाद से स्थानीय लोगों में कुछ राहत की भावना देखी गई, क्योंकि धमाके की ताकत इतनी अधिक थी कि कई घरों की खिड़कियां टूट गईं, दीवारें क्षतिग्रस्त हो गईं और कुछ जगहों पर छतें भी दरक गईं।
किस तरह हुआ धमाका? क्या है पूरा मामला?
जांच अधिकारियों के अनुसार शुक्रवार देर रात लगभग 11 बजे धमाका उस समय हुआ जब विशेषज्ञ टीम पुलिस स्टेशन परिसर में रखे गए विस्फोटकों की जांच कर रही थी। ये विस्फोटक उसी मामले से संबंधित थे जिसमें हाल ही में एक “व्हाइट-कालर टेरर नेटवर्क” का पर्दाफाश किया गया था। माना जा रहा है कि जांच के लिए नमूने निकालते समय किसी तकनीकी त्रुटि या रासायनिक प्रतिक्रिया के चलते यह धमाका हुआ।
धमाके की आवाज़ इतनी तेज़ थी कि कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई। घटनास्थल से उठने वाले धुएं ने पूरे इलाके को कुछ देर के लिए ढक लिया। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी और कर्मचारी भी इस विस्फोट की चपेट में आ गए। पुलिस स्टेशन का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया, और आसपास के मकानों को भी भारी झटका लगा।
9 की मौत, 32 घायल — अस्पतालों में अफरा-तफरी
धमाके के तुरंत बाद बचाव टीमें मौके पर पहुंचीं और स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। श्रीनगर के प्रमुख अस्पतालों में रात भर चिकित्सा टीमें काम करती रहीं। कई घायल अभी भी आईसीयू में भर्ती हैं और उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।
स्वास्थ्य मंत्री सकीना इत्तू ने भी अस्पताल पहुंचकर घायलों की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने डॉक्टरों से बातचीत कर यह सुनिश्चित किया कि मरीजों के इलाज के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों।
स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल
नौगाम इलाका आमतौर पर शांत माना जाता है, लेकिन इस घटना के बाद लोगों में डर और तनाव का माहौल है। कई निवासियों ने बताया कि विस्फोट की आवाज़ भूकंप जैसी लगी और कुछ देर तक उन्हें समझ ही नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है। कई परिवारों ने रात सड़क पर या रिश्तेदारों के घर बिताई क्योंकि उनके मकानों की हालत खराब हो चुकी थी।
रहवासियों का कहना है कि इस तरह के विस्फोटों की जांच बेहद सावधानी से की जानी चाहिए थी ताकि ऐसी त्रासदी से बचा जा सके। लोगों ने मांग की है कि ऐसे विस्फोटक सामग्री को भविष्य में घने आबादी वाले क्षेत्रों में न रखा जाए।
जांच समिति का गठन — कारणों की गहराई से पड़ताल होगी
सरकार ने इस हादसे की व्यापक जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रारंभिक अनुमान यह है कि विस्फोटकों को हैंडल करते समय कोई तकनीकी गलती हुई होगी, लेकिन इसकी पुष्टि फॉरेंसिक जांच के बाद ही होगी। विशेषज्ञ यह भी पता लगा रहे हैं कि क्या विस्फोटकों के साथ कोई मानक प्रक्रिया का उल्लंघन हुआ था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए SOPs को और मजबूत किया जाएगा।
आसपास के मकानों के नुकसान की भरपाई का वादा
धमाके में सिर्फ पुलिस स्टेशन ही नहीं, बल्कि आसपास के कई घरों और दुकानों को भी गंभीर नुकसान हुआ। कई लोगों की आजीविका और घर दोनों प्रभावित हुए। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार नुकसान का आकलन करके शीघ्र मुआवज़ा देगी।
स्थानीय प्रशासन ने सर्वे टीमें तैनात कर दी हैं जो प्रत्येक प्रभावित घर और दुकान का निरीक्षण करके रिपोर्ट तैयार करेंगी।
परिवारों की पीड़ा — एक भावुक दिन
मृतक परिवारों के घर मातम पसरा हुआ है। कई लोग अपने प्रियजनों की याद में रोते-बिलखते रहे। उनमें से कई पुलिसकर्मी और सरकारी कर्मचारी थे जो अपने काम के दौरान इस हादसे में मारे गए।
सरकार की ओर से कहा गया है कि सभी मृतकों के परिवारों को अनुग्रह राशि, सरकारी नौकरी या अन्य आर्थिक सहायता देने पर विचार किया जाएगा।
निष्कर्ष
नौगाम पुलिस स्टेशन का यह विस्फोट जम्मू-कश्मीर के लिए एक बड़ी त्रासदी है। जांच जारी है और सरकार ने स्पष्ट किया है कि पीड़ितों को न्याय और सहायता देने में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी। CM उमर अब्दुल्ला द्वारा दिए गए आश्वासन से लोगों को उम्मीद है कि उन्हें जल्द ही मुआवज़ा और सुरक्षा मिलेगी।



