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Karachi Safe City Project Theft: कराची के पॉश इलाके में चौंकाने वाली चोरी! सीसीटीवी नेटवर्क का भारी बॉक्स गायब, पुलिस भी रह गई हैरान

कराची के क्लिफ्टन इलाके में हाई-टेक चोरी – सेफ सिटी कैमरा नेटवर्क का बॉक्स रहस्यमय तरीके से गायब

कराची: पाकिस्तान के सबसे पॉश और सुरक्षित इलाकों में से एक क्लिफ्टन (Clifton) से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। शहर की सुरक्षा के लिए लगाए गए उपकरणों को ही अब सुरक्षा की ज़रूरत पड़ गई है। कराची के सेफ सिटी सर्विलांस नेटवर्क (Karachi Safe City Project) का एक डिस्ट्रीब्यूशन बॉक्स रहस्यमय तरीके से चोरी हो गया। यह वही उपकरण था जो सीव्यू इलाके में लगे सुरक्षा कैमरों को पावर सप्लाई देता था।

हैरानी की बात यह है कि यह चोरी 6 नवंबर को हुई और बॉक्स सात दिन बाद, 13 नवंबर को एक खाली प्लॉट से बरामद हुआ। पुलिस अब भी इस मामले से हैरान है क्योंकि यह घटना ऐसे इलाके में हुई जहां शहर के सबसे प्रभावशाली लोग रहते हैं और जहां हर वक्त पुलिस और सिक्योरिटी गश्त में रहती है।


कैसे हुआ यह अजीबोगरीब चोरी का मामला

पुलिस के मुताबिक चोरी का यह मामला तब सामने आया जब सीव्यू अपार्टमेंट के पास लगे खंभे से यह भारी डिस्ट्रीब्यूशन बॉक्स अचानक गायब पाया गया। यह बॉक्स “नॉन-ऑपरेशनल” था, यानी फिलहाल बिजली से जुड़ा नहीं था, लेकिन इसकी कीमत कई लाख पाकिस्तानी रुपये बताई जा रही है।

डीआईजी साउथ असद रज़ा ने बताया कि यह घटना 6 नवंबर को रिपोर्ट की गई थी। उन्होंने कहा, “यह सी रॉक अपार्टमेंट्स के पास एक नॉन-एनर्जाइज्ड पोल साइट थी। चोरी हुआ बॉक्स बाद में एक खाली प्लॉट से बरामद कर लिया गया।”

हालांकि, सबसे बड़ी पहेली यह है कि इतने बड़े और भारी धातु के बॉक्स को किसी ने बिना शोर-शराबे के कैसे उतार लिया?


क्रेन वाले वाहन की गुत्थी

पुलिस की जांच में सामने आया है कि चोरी की रात एक क्रेन लगी गाड़ी उस जगह पर देखी गई थी। एक होटल कर्मचारी ने बताया कि “हमने एक वाहन को क्रेन के साथ उस खंभे के पास काम करते देखा था। कुछ घंटे बाद पता चला कि बॉक्स गायब है।”

अब पुलिस को शक है कि वही वाहन इस चोरी में इस्तेमाल हुआ। बॉक्स को खोलने और उतारने के लिए किसी प्रशिक्षित व्यक्ति की जरूरत होती है, इसलिए यह संभावना जताई जा रही है कि चोरी किसी तकनीकी जानकारी रखने वाले गिरोह ने की हो।


इलाके में अंधेरा और CCTV कैमरे बंद

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि जिस इलाके से यह चोरी हुई, वह “पूरी तरह ब्लैकआउट” स्थिति में था। वहां न तो स्ट्रीटलाइट्स चालू थीं, न ही CCTV कैमरे काम कर रहे थे

DIG रज़ा ने बताया कि पूरे इलाके में सिर्फ सी रॉक अपार्टमेंट्स का एक कैमरा काम कर रहा था, जो केवल पार्किंग एरिया को रिकॉर्ड कर रहा था। इसलिए, पुलिस के पास संदिग्धों की पहचान के लिए बहुत कम सबूत हैं।

चोरी वाले खंभे पर न कोई अलार्म सिस्टम था, न ही कोई रियल-टाइम मॉनिटरिंग व्यवस्था। इसी वजह से चोरों ने बिना किसी बाधा के यह काम अंजाम दिया।


सेफ सिटी प्रोजेक्ट के लिए झटका

यह घटना कराची के सेफ सिटी प्रोजेक्ट के लिए बड़ा झटका साबित हुई है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य शहर के सभी प्रमुख इलाकों में CCTV निगरानी के माध्यम से अपराधों को रोकना था। लेकिन जब इस नेटवर्क का हिस्सा ही चोरी हो जाए, तो सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठते हैं।

सेफ सिटी प्रोजेक्ट के डायरेक्टर जनरल आसिफ इजाज शेख ने पुष्टि की कि चोरी के बाद पूरे इलाके के कैमरों को ऑफलाइन कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि “चोरी हुआ बॉक्स कई तकनीकी पार्ट्स से लैस था और इसकी कीमत लाखों रुपये है।”

शेख ने यह भी कहा कि सुरक्षा उपकरणों को बिजली से जोड़ने से पहले साइट पर निगरानी बढ़ाने की जरूरत है, ताकि इस तरह की घटनाओं को दोहराया न जा सके।


पुलिस और प्रशासन की अगली कार्रवाई

पुलिस ने इस घटना की रिपोर्ट दर्ज कर ली है और आसपास के CCTV फुटेज की जांच जारी है। हालांकि, अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

DIG असद रज़ा ने बताया कि उन्होंने कैंटोनमेंट बोर्ड क्लिफ्टन (CBC) और कराची म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (KMC) को पत्र लिखा है, ताकि इलाके की स्ट्रीटलाइट्स को तुरंत बहाल किया जा सके।

उन्होंने कहा, “अंधेरा और कैमरों का न चलना चोरों के लिए अनुकूल माहौल बनाता है। अगर स्ट्रीटलाइट्स चालू होतीं, तो यह चोरी शायद नहीं होती।”


स्थानीय लोगों में नाराजगी

क्लिफ्टन और सीव्यू के निवासी इस घटना से गुस्से में हैं। उनका कहना है कि जब शहर के सबसे सुरक्षित इलाके में इस तरह की चोरी हो सकती है, तो बाकी इलाकों की हालत का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

एक स्थानीय निवासी ने कहा, “हम अपने टैक्स से सुरक्षा व्यवस्था के लिए भुगतान करते हैं, लेकिन जब खुद सुरक्षा उपकरण चोरी हो जाएं, तो यह जनता के भरोसे पर चोट है।”


चोरी के पीछे क्या मंशा थी?

पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि आखिर इस चोरी के पीछे उद्देश्य क्या था। यह बॉक्स “नॉन-ऑपरेशनल” था, यानी उसमें कोई डेटा या चालू सिस्टम मौजूद नहीं था। फिर भी इसे निशाना बनाना कई सवाल खड़े करता है।

कुछ अधिकारियों का मानना है कि चोरों को शायद लगा होगा कि इसमें महंगे इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स या कॉपर वायर हैं, जिन्हें बेचकर पैसे कमाए जा सकते हैं। वहीं, कुछ विशेषज्ञ इसे संभावित सबोटाज (sabotage) भी मान रहे हैं — यानी सुरक्षा नेटवर्क को नुकसान पहुंचाने की कोशिश।


निष्कर्ष

कराची के क्लिफ्टन इलाके में हुई यह चोरी सिर्फ एक तकनीकी उपकरण के गायब होने की कहानी नहीं है, बल्कि यह सवाल है कि क्या शहर का सुरक्षा नेटवर्क खुद सुरक्षित है?

सेफ सिटी प्रोजेक्ट का उद्देश्य अपराधों को रोकना था, लेकिन अब पुलिस को उन्हीं उपकरणों की सुरक्षा करनी पड़ रही है जो सुरक्षा देने के लिए लगाए गए थे।

पुलिस की जांच जारी है, लेकिन जब तक इलाके की स्ट्रीटलाइट्स और CCTV सिस्टम दुरुस्त नहीं होते, तब तक ऐसी घटनाओं का दोहराव संभव है। यह घटना प्रशासन के लिए एक जागने का अलार्म है कि सुरक्षा केवल कैमरे लगाने से नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखने से भी आती है।

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