
जहानाबाद बस स्टैंड से उठी नई उम्मीद की आवाज़
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की आहट के साथ ही राज्य में चुनावी माहौल तेज़ हो गया है। मगर जहानाबाद के बस स्टैंड पर बैठे 25 वर्षीय विकास कुमार की आवाज़ इस राजनीतिक हलचल से थोड़ा अलग सुनाई देती है। विज्ञान विषय से स्नातक होने के बावजूद वह आज ऑटो चलाने को मजबूर है। वह कहते हैं, “इस बार बस नारे नहीं, काम चाहिए। नई शुरुआत चाहिए। हम जैसे पढ़े-लिखे युवाओं के लिए भी कोई रास्ता होना चाहिए।”
विकास ने अपना ऑटो 3.5 लाख रुपये के कर्ज पर लिया है। हर दिन की कमाई इतनी भी नहीं होती कि EMI और घर खर्च दोनों चल जाएं। आसपास बैठे दूसरे ऑटो चालक भी सहमति में सिर हिलाते हैं। कई कहते हैं कि नौकरी न होने के कारण लोग बाहर शहरों में मजदूरी करने को मजबूर हैं।
बेरोजगारी और पलायन – जहानाबाद की सबसे बड़ी चिंता
20 वर्षीय समीम कुमार, जो अपने पिता के गैराज में काम में हाथ बंटाते हैं, बताते हैं:
“हमारे यहां सपने देखना भी धीमा लगता है। डिग्री लेने के बाद भी लोग बेरोजगार हैं। कई लोग रोज़गार की तलाश में राज्य छोड़ देते हैं।”
यह भावना सिर्फ समीम या विकास की नहीं है। जहानाबाद के ज्यादातर युवाओं की यही कहानी है। शिक्षा और रोजगार की कमी यहां की राजनीतिक बहस का मुख्य विषय बन चुकी है।
जहानाबाद जिला: राजनीतिक मुकाबला तेज
जहानाबाद जिले में तीन विधानसभा सीटें हैं —
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जहानाबाद
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घोसी
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मखदूमपुर
ये तीनों सीटें 11 नवंबर को वोटिंग के लिए जाएंगी।
जहानाबाद सीट पर मुकाबला दिलचस्प है।
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NDA ने यहां चदेश्वर प्रसाद को JDU टिकट पर उतारा है।
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INDIA गठबंधन की ओर से राहुल कुमार RJD के टिकट पर मैदान में हैं।
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वहीं, प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने भी उम्मीदवार खड़ा किया है।
हालांकि, स्थानीय लोग इसे मुख्यतः NDA बनाम INDIA की सीधी टक्कर मान रहे हैं।
घोसी में CPI(ML) बनाम JD(U) की भिड़ंत
घोसी सीट पर CPI(ML) के रंबाली सिंह यादव का मुकाबला JDU के रितुराज कुमार से हो रहा है।
यहां CPI(ML) का एक मजबूत जनाधार है, और यह लड़ाई जातीय समीकरणों के बीच विकास और बदलाव की उम्मीद पर भी टिकी है।
33 वर्षीय तारिक अनवर, जो CPI(ML) के लिए प्रचार कर रहे हैं, कहते हैं:
“लोगों में 20 साल पुराने शासन को बदलने की इच्छा है। इस बार लोग सिर्फ जाति के आधार पर नहीं, अपने भविष्य को देखते हुए वोट देंगे।”
लेकिन सत्ता पक्ष भी मजबूत तर्क दे रहा है
JDU और BJP समर्थक कहते हैं कि नीतीश कुमार के कार्यकाल में जहानाबाद में काफी विकास कार्य हुए हैं।
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सड़कें
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पुल
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बिजली व्यवस्था
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शिक्षा संस्थान
इन क्षेत्रों में सुधार देखने को मिला है।
केंद्र की योजनाएँ जैसे अवसर, उज्ज्वला, आवास योजना, हर घर जल भी वोटरों के मन में अपना प्रभाव रखती हैं।
महिला मतदाता और ‘मुख्यमंत्री महिला रोज़गार योजना’
महिलाएं इस चुनाव की निर्णायक मतदाता मानी जा रही हैं। राज्य सरकार ने हाल में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना शुरू की, जिसके तहत महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जा रही है।
घोसी के पाली गाँव की नूरी कहती हैं,
“हमें 10,000 रुपये मिले हैं। उससे मैंने दो बकरियाँ खरीदी हैं। थोड़ा बहुत सहारा तो है, पर इससे जीवन बदलता नहीं।”
कुछ महिलाएं इस योजना के पक्ष में हैं, वहीं कुछ इसे चुनावी लालच बताती हैं।
स्थानीय समस्याएँ अभी भी जस की तस
जहानाबाद शहर में लंबे समय से रेलवे अंडरपास में जलभराव की समस्या है।
बारिश के मौसम में यहाँ वाहन डूबने जैसी स्थिति हो जाती है।
ऑटो चालक विकास बताते हैं:
“हर सरकार आई, वादा किया, पर यह समस्या आज भी खड़ी है।”
कभी हिंसा की छाया वाला क्षेत्र अब बदलाव की राह पर
यह इलाका कभी जातिगत संघर्षों का केंद्र रहा था, खासकर 1990 के दशक में।
स्थानीय निवासी संजय सिंह कहते हैं:
“हालत अब बहुत बदले हैं। लेकिन एक सरकार का लंबे समय तक सत्ता में बने रहना ठीक नहीं। लोकतंत्र में बदलाव जरूरी है।”
चुनावी प्रचार अपने अंतिम चरण में
इंडिया गठबंधन के मुख्यमंत्री पद के चेहरे तेजस्वी यादव ने चुनाव प्रचार समाप्त होने से पहले जहानाबाद में रैली की और युवाओं को रोजगार देने का बड़ा वादा दोहराया।
मतदान 11 नवंबर को होगा और परिणाम 14 नवंबर को सामने आएंगे।
जहानाबाद के युवा अब फैसला कर चुके हैं
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वे स्थायी रोजगार चाहते हैं
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पलायन रुकना चाहते हैं
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स्थानीय व्यवसाय और उद्योग बढ़ने चाहिए
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और सबसे बढ़कर, एक नई शुरुआत चाहिए
इस चुनाव में जहानाबाद की जनता सिर्फ नेताओं की भाषण कला नहीं, उनकी नीयत और नीति को परखेगी।



